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Friday, 4 November 2011

वो

किसी ने दरवाजा
ज़ोर से खटकाया
मैंने खोला
और उसे देखा
तो देखता ही रह गया
वो मुस्कुरा रही थी
किसी बिछड़े दोस्त की तरह
इस शहर मे
मेरे होने की खबर पाते ही
वो दौड़ती हुई आई थी
वो
वो
अरे हाँ वो
वो
जो मेरी मौत थी।

3 comments:

  1. बिलकुल बकवास आपसे सहमत हूँ
    इस उम्र में जिन्दगी की बाते होनी चाहिए,
    मरने की बाते करने की कोई उम्र नहीं होती.... :(

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  2. ऐसा मत लिखा करो ..... रूह काँप गयी .....

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  3. बहुत ही गहरी बात कह दी..... क्या कहू? निशब्द....

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