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Monday, 7 November 2011

शशि शेखर


बहुत बचपन मे (7-8 साल की उम्र मे ) हमारे घर 'आज' अखबार आया करता था। संपादकीय पढ़कर पापा अक्सर कहते आज शशि शेखर ने ये लिखा वो लिखा (तब वह आगरा संस्करण के स्थानीय संपादक थे 90 के दशक मे) ;मेरी समझ मे तब ये बातें नहीं आती थीं बस इतना समझ गया था कि शशि शेखर अखबार मे लिखते हैं। पर आज जब वह 'हिंदुस्तान' के प्रधान संपादक हैं हर रविवार उनके आलेख को मैं  ज़रूर पढ़ता हूँ। हो सकता है कुछ लोगों का उनकी बात से मत वैभिन्नय हो पर उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी बात यह है कि सड़क पर रिक्शा चलाने वाला और झूग्गी मे रहने वाला थोड़ा भी पढ़ा लिखा आदमी उनकी बात आसानी से समझ सकता है।
एक अच्छी लेखन की शैली की यही तो विशेषता है कि वो आम पाठक को बांधे रखे और बात उसको समझ मे आने वाली हो। इस दृष्टि से शशि शेखर मेरे सबसे पसंदीदा स्तंभकार हैं।

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