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Thursday, 10 November 2011

जहां कोई सुनने को तैयार न हो वहाँ भैंस के आगे बीन बजाने का कोई फायदा नहीं है। इससे तो एकला चलो रे ज़्यादा अच्छा है कम से कम इस तरह खुद को तसल्ली तो दे ही सकते हैं  और कुछ हो या न हो।

3 comments:

  1. काफी सही कहा आपने !
    इसका फायदा खुद को महसूस होता है दूसरो को नहीं .

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