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Wednesday, 16 November 2011

मेरा इंतज़ार


जंगली धूप और
मरघटी रातों मे
अनजान गलियों की ,
सुनसान  सड़कों पर
अकेले चलते हुए
मैंने देखा -
हर मोड़ पर कर रहे थे
मेरा इंतज़ार
वक़्त के अदृश्य
पहरेदार!

http://jomeramankahe.blogspot.com/2011/11/blog-post_16.html

6 comments:

  1. वक़्त के अदृश्य
    पहरेदार...वक्त ही सबसे बड़ी चीज है
    गहरा चिंतन व्यक्त करती रचना

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  2. कम शब्दों में बहुत कुछ संप्रेषित करती अर्थपूर्ण रचना ।

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  3. वक्त... तभी तो कहा था मैंने कभी आने वाला पलल जाने वाला है वाकई वक्त शायद सबसे बड़ी चीज़ है।

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  4. यशवंत जी
    संक्षिप्त में अर्थपूर्ण सुंदर रचना,..
    मेरे नए पोस्ट में स्वागत है ...

    ReplyDelete
  5. गागर में सागर....

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