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Tuesday, 22 November 2011

अभिभूत हूँ ...........

यूं तो हमेशा से ही मेरा जन्मदिन सादगी से मनाया जाता रहा है और कल  भी उसी सादगी से मनाया गया और आने वाले वर्षों मे भी यह सादगी कायम रहेगी।हर साल की तरह पापा-मम्मी ने कल भी हवन किया और कुछ आहुतियाँ मैंने भी डालीं। वैसे भी हवन विशुद्ध भारतीय और वैदिक पद्धति का ज़रूरी हिस्सा है  जिससे न केवल आसपास का वायुमंडल स्वच्छ होता है बल्कि आत्मिक शांति भी मिलती है। खैर अगर इस विषय पर कुछ बोलूँ प्रवचन जैसा हो जाएगा और आप लोग पक जाओगे इसलिए यह बात बस इतनी ही।

हाँ तो मैं यह कह रहा था कि मुझे इस बात का एहसास तो था कि अच्छी ख़ासी शुभकामनाएँ मिलने वाली हैं ब्लॉग पर भी और फेसबुक पर भी और जिस तरह से 20 तारीख से ही एस एम एस -फोन और फेसबुक का सिलसिला एडवांस मे चला यह विश्वास पक्का था।

लेकिन मैं सपने में  भी नहीं सोच सकता था कि कोई मुझ पर कविता लिख देगा लेकिन यह सपना नहीं अब तो हकीकत है और आपके सामने है नीचे की तस्वीर देखिये--


और वो 'कोई' कोई और नहीं आदरणीय अरुण निगम जी हैं जिन्होने दो दिन पहले ही 22 तारीख को शब्दों की मिठाई खाने का ज़िक्र मेरी फेसबुक वॉल पर किया था लेकिन तब मैं उनका मतलब नहीं समझ पाया था।यह कविता उन्होने मुझे मेल पर भेजी है।  मैं किन शब्दों मे उनको धन्यवाद कहूँ समझ नहीं पा रहा हूँ लेकिन उनका यह स्नेह अभिभूत कर देने वाला है।

एक और सरप्राइज़ गूगल बाबा ने भी दे दिया पता नहीं जाने अनजाने या कुछ और बात हो। कोई चीज़ सर्च करने जब गूगल खोला तो यह नज़ारा था---


इसमें गूगल के टाइटिल पर नज़र डालिये। इसी साइट को जब पापा की आई डी से खोला तो 'गूगल' अपने स्टेंडर्ड रूप मे ही लिखा मिला।

बहुत लोगों के लिए ये कोई बड़ी बात नहीं क्योंकि 'ऐसा तो होता रहता है'।  पर मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात है।

हाँ एक दो लोगों ने मुझ से केक खाने को कहा मुझे केक पसंद भी है लेकिन पापा -मम्मी को नहीं पसंद वैसे भी इस मौके पर अकेले खाना मुझे अच्छा नहीं लगेगा तो प्लीज़ इस बार  के लिए सॉरी पर कभी मौका मिलेगा तो ज़रूर सबके साथ केक का भी स्वाद लिया जाएगा।

और हाँ देर से ही सही पर चलते चलते वर्चुअल मिठाई का स्वाद आप भी ले लीजिये---


 एक बार पुनः आप सभी की शुभकमानाओं-आशीर्वाद और स्नेह के लिये तहे  दिल से शुक्रिया। इसे आगे भी बनाए रखिएगा।

6 comments:

  1. ishawar ki kripa bani rahe .......bahut khub

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  2. खा ली वर्चुअल मिठाई किन्तु हमारी शुभाषीश और हमारी दुआ हकीकत में सदा तुम्हारे साथ रहे यही कामना है !
    सदा खुश रहो !

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  3. यश जी यह जानकर खुशी हुयी और गर्व भी कि आप और आपके परिवार के सदस्य विशुद्ध भारतीय परम्पराओं मे अटूट विश्वास रखते हैं।
    अरूण जी का उपहार वाकई अनूठा है और इस बात का उद्धोषक भी वो आपसे सच्चा स्नेह रखते है
    हमारी ढेर सारी शुभकामनाये

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  4. शब्द-मिठाई भली लगी ! आई तुम्हें पसंद
    अभिभूत हम भी हुए , देख के यश-आनंद.
    थाल मिठाई से भरा , स्वाद से है भरपूर
    नानाविध मिष्ठान्न संग , लड्डू मोती चूर.
    सदा रहो खुशहाल तुम, सबका पाओ प्यार
    रहो सफल हर क्षेत्र में,खुशियाँ मिलें अपार.

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  5. सादगी से मनाया वाला जन्म दिन और वैदिक परम्पराओं का अनुपालन सच में प्रेरक है।
    हमने तो एक और चीज़ इसमें जोड़ दिया है -- वृक्षारोपण।

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  6. mithai to theek hai par meri chocolate???
    well... ishwar aapki har kaamna poorna kare...

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