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Wednesday, 9 November 2011

कुछ लोगों के लिए जज़्बातों की कोई कीमत नहीं होती ऐसे लोग दूसरे के जज़्बातों से खेलकर मज़े लेते हैं लेकिन ये नहीं जानते कि कभी उनके साथ भी ऐसा ही हो सकता है। वक़्त आज उनके साथ है ,रहने दीजिये,खुद को तसल्ली देना और खुद का साथ देने मे ही समझदारी है क्योंकि खुद से अच्छा खुद का कोई दोस्त नहीं होता।

2 comments:

  1. प्रिय यशवंत माथुर जी बहुत सुन्दर विचार और कथन आप के ..हम को हम से अच्छा समझने वाला और साथ निभाने वाला सच में कोई नहीं ..
    भ्रमर ५

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  2. sahi baat hai par sab ek jaise nahi hote hai,,,
    kabhi kabhi aisa bhi hota hai ki sab kuch samajhate huye bhi use jataya nahi ja sakata hai
    kyunki uske piche kisi ki majburiya bhi hoti hai..

    ReplyDelete

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