इस ब्लॉग पर पोस्ट की गयी तस्वीरों (Photographs) पर क्लिक कर के आप उन्हें और स्पष्ट देख सकते हैं।

Saturday, 26 November 2011

घने अंधेरे में
चलते चलते
अचानक
एक हल्की सी रोशनी
आ गयी मेरा साथ निभाने
और मेरी परछाई
कोशिश करने लगी
मुझ से बातें करने की
न चाह कर भी
मैं मुंह न मोड़ सका
उससे
सारे रास्ते
मुझे झेलना ही पड़ा
अपने ही अक्स को।

2 comments:

  1. परछाईं ही तो है जब हम रोशनी में होते हैं तो हमारा साथ देती है।

    ReplyDelete

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन कमेन्ट मे न दें।
कमेन्ट मोडरेशन सक्षम है। अतः आपकी टिप्पणी यहाँ दिखने मे थोड़ा समय लग सकता है।

Please do not advertise in comment box.
Comment Moderation is active.so it may take some time for appearing your comment here.