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Sunday, 27 November 2011

चैट

बात करने का एक तरीका होता है चाहे वह बात फोन पर हो या चैट पर ,किसी बड़े से हो या छोटे से,या बराबर वाले से। बात शुरू हाय,हैलो या नमस्ते से होती है तो खत्म भी कम से कम बाय से ही होती है। खासतौर से ऑनलाइन चैट शुरू हो जाने के बाद अगर एक तरफ से किसी का जवाब नहीं आता तो दूसरे को उलझन होना स्वाभाविक है। इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि बात को सही तरह से समाप्त कर दिया जाए। लेकिन ऐसा होता नहीं है या होता भी है तो  कभी कभी और बहुत कम होता है। नतीजा चैट लिस्ट से बाहर हो जाने के रूप मे सामने आता है।

कुछ ऐसे ही दोस्तों की संगत मुझे भी प्राप्त हो गयी है जो बात करते करते अचानक गायब हो जाते हैं या बात को लटकाकर चले जाते हैं उसके बाद भी उनको अपेक्षा  रहती है कि उनकी बात को गंभीरता से लिया जाए। कुछ लोगों को तो मैंने उनके आचरण की वजह से चैट लिस्ट से बाहर भी कर रखा है। हालांकि इससे कुछ होने वाला नहीं है क्योंकि मैं खुद अब बहुत कम ही ऑनलाइन नज़र आता हूँ।  

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