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Tuesday, 15 November 2011

बीती बातों का खंजर लिये
न जाने क्यों
बे रहम हो चला है वक़्त !

--यशवन्त

2 comments:

  1. yesi beeti baten jo dukh de unko bhula dena hi theek hai.

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  2. चुभन की याद ज्यादा रहती है... खुस्बुवों को याद रखिये ..

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