इस ब्लॉग पर पोस्ट की गयी तस्वीरों (Photographs) पर क्लिक कर के आप उन्हें और स्पष्ट देख सकते हैं।

Monday, 7 November 2011

पुनर्जीवन

एक ख्वाब कल रात को देखा .....अनजाने भंवर मे ......मैं घिरता जा रहा था .....फँसता जा रहा था .....निहायत ही अकेला .....और निर्वात का ......एक अजीब सा अनुभव.......जहां मेरी चीख़ों और दर्द को ........कोई सुनने वाला ही नहीं था.......कि  तभी महसूस हुआ पीठ पर एक हाथ .....कौन था वो नहीं पता पर खीच लाया.....उस भयंकर निर्वात से मुझको .....और मैं जी रहा हूँ पुनर्जीवन .....उसी की बदौलत। 

1 comment:

  1. पद्यात्मक गद्य अच्छा लगा.

    ReplyDelete

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन कमेन्ट मे न दें।
कमेन्ट मोडरेशन सक्षम है। अतः आपकी टिप्पणी यहाँ दिखने मे थोड़ा समय लग सकता है।

Please do not advertise in comment box.
Comment Moderation is active.so it may take some time for appearing your comment here.