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Sunday, 27 November 2011

शब्द!
न जाने क्यों
इतना बिखरे बिखरे से लग रहे हैं
शायद इंतज़ार कर रहे हैं
मेरे भी बिखरने का
ये बिखरे बिखरे से
शब्द!
 
(कभी इसे फेसबुक स्टेटस मे लिखा था)

2 comments:

  1. बहुत खूब लिखा है.....

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  2. आप की रचना बड़ी अच्छी लगी और दिल को छु गई
    इतनी सुन्दर रचनाये मैं बड़ी देर से आया हु आपका ब्लॉग पे पहली बार आया हु तो अफ़सोस भी होता है की आपका ब्लॉग पहले क्यों नहीं मिला मुझे बस असे ही लिखते रहिये आपको बहुत बहुत शुभकामनाये
    आप से निवेदन है की आप मेरे ब्लॉग का भी हिस्सा बने और अपने विचारो से अवगत करवाए
    धन्यवाद्
    दिनेश पारीक
    http://dineshpareek19.blogspot.com/
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

    ReplyDelete

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