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Sunday, 13 November 2011

बेचैन शामों मे
डूबते सूरज की मंद रोशनी मे
डर  जाता हूँ अक्सर
अपना अक्स देख कर!

1 comment:

  1. अक्स देख डरिये नही यशवंत जी.
    मेरे ब्लॉग पर आकर कुछ नाम जप कर लीजियेगा.
    आपका मजाक भी बहुत सीरियसली ले लेती हैं,सुनीता जी.

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