इस ब्लॉग पर पोस्ट की गयी तस्वीरों (Photographs) पर क्लिक कर के आप उन्हें और स्पष्ट देख सकते हैं।

Friday, 2 December 2011

आय एम शॉक्ड

"Thanks Yashwant ! for his eagerness to help!
God Bless !

Ashish "

यही वो पंक्तियाँ हैं  जो अक्षरशः मुझे याद हैं पर अफसोस कि इसकी स्कैन कॉपी मेरे पास नहीं है :( और याद क्यों न हों मेरे प्रोफेशनल कैरियर का सब से पहला कमेन्ट था यह; जो आंटी जी के यह कहने कि इसके लिए कुछ लिख दो आशीष जी ने बिग बाज़ार मेरठ पी वी एस स्टोर मे शायद  17 या 18 अगस्त 2008 को वहाँ की "शेयर विद अस"बुक मे लिखा था।मुझे याद है कि 15 अगस्त के ओफर्स बीत जाने के बाद आशीष जी एज़ ए कस्टमर आंटी जी के साथ अपना खरीदा कुछ सामान एक्सचेंज करने आए थे। चूंकि उस दिन मैं फ्लैट शिफ्ट (स्टोर ओपनिंग 10 बजे से क्लोजिंग रात 10 :30 बजे तक) मे कस्टमर सर्विस डेस्क पर काम कर रहा था इसलिये उस दिन करीब 350 एक्सचेंज मैंने क्लीयर किए थे। शायद आंटी जी को मेरा काम करने का तरीका पसंद आया था और उसके बाद जब भी आशीष जी स्टोर मे आते तो मुझ से मिलते ज़रूर थे। उसी महीने यानि 31 अगस्त को मुझे एम्प्लोयी ओफ द मंथ भी चुना गया मुझे लगता है यह आशीष जी और आंटी जी के  आशीर्वाद से ही संभव हुआ होगा क्योंकि इस अवार्ड के बारे मे कि मुझे मिलेगा मैं सोच भी नहीं सकता था।
बाद मे मैंने मेरठ से कानपुर ट्रांसफर ले लिया और आशीष जी से डिसकनेक्ट हो गया। उस समय मैंने नहीं सोचा था कि एक ब्लॉगर के रूप मे उन से फिर से संपर्क होगा।  लेकिन ऐसा हुआ और यह एक चौंकाने वाला अनुभव था क्योंकि मैंने ब्लॉग 2010 मे बनाया और तब तक मेरठ छोड़े 2 साल हो गए थे।इतने दिन तक जाने कितने ही मोल्स मे उनका जाना हुआ होगा और मेरे जैसे जाने कितने ही कस्टमर सर्विस एक्ज़ीक्यूटिव्स से मिले होंगे।   लेकिन यह आशीष जी का बड़प्पन ही कहूँगा उन्होने मुझे याद रखा और उनका याद रखना भी मेरे लिये एक उपलब्धि ही है।

किसी अपने का छोड़ कर जाना बहुत दुख देता है और कल जब आशीष जी के ब्लॉग पर आंटी जी के निधन  की दुखद सूचना पढ़ी मेरा मन किसी काम मे नहीं लगा यहाँ तक कि आज की हलचल भी बहुत बेमन से बना कर लगाई है।  मुझे नहीं मालूम मुझे आंटी से कैसा लगाव था लेकिन अगर पूर्वजन्म होता है तो यह कोई ऐसा ही संबंध होगा।

आगे और कुछ लिखते नहीं बन रहा है ;मैं बहुत शॉक्ड हूँ यह सब जान कर और मेरी ईश्वर से कामना है कि आशीष जी को यह असीम दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।

4 comments:

  1. आत्मीयता से लिखी गई पोस्ट।
    ईश्वर से कामना है कि आशीष जी को यह असीम दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।

    ReplyDelete
  2. डियर यशवंत,
    'आप भला तो सब भला'. तुम इसकी मिसाल हो. इस लायक नहीं मैं.

    एक बार गुरु नानक के साथ मर्दाना भ्रमण पर था. उसके मन में सवाल आया, "सच क्या है और झूठ क्या है?" गुरु से पूछा तो उन्होंने पेड़ से गिरे हुए दो पत्ते उठा लाने को कहा. मर्दाना ने पत्ते लाकर गुरु को दिए तो गुरु ने एक पर "जीवन" लिख दिया और दूसरे पर "मृत्यु".
    मर्दाने ने "जीवन" लिखा पत्ता छुआ और पूछा "ये क्या है?" नानक बोले: "झूठ"
    मर्दाने ने "मृत्यु" लिखा पत्ता छुआ और पूछा "ये क्या है?" नानक बोले: "सच".

    शायद आगे कुछ कहने की ज़रुरत नहीं.

    आशीष

    ReplyDelete
  3. श्रद्धा सुमन ....

    ReplyDelete
  4. सूचनापरक पोस्ट के लिए धन्यवाद । मेरे नए पोस्ट पर आपका आमंत्रण है । धन्यवाद ।

    ReplyDelete

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन कमेन्ट मे न दें।
कमेन्ट मोडरेशन सक्षम है। अतः आपकी टिप्पणी यहाँ दिखने मे थोड़ा समय लग सकता है।

Please do not advertise in comment box.
Comment Moderation is active.so it may take some time for appearing your comment here.