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Wednesday, 7 December 2011

just an imagination ......

माना कि
कितने ही फर्जी नामों से
तुम मेरे आसपास हो
पर ये मत भूलना
देखा है मैंने
नकाब के पीछे छिपा
तुम्हारा असली चेहरा
हजारों बार।

9 comments:

  1. उठ गया नकाब उनके हर हसीं राज़ से,
    फिर भी वो ख़ुद को पर्दानशीं कहते रहे.

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  2. तभी सरकार सोशल नेटवर्किंग साइटों पर आंख तरेरे हुए है!

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  3. दूसरे ब्लॉग पर कमेंट नहीं हो पा रहा है...गाना बजता है और ढेर सारे पॉप अप आ जाते हैं.

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  4. सुंदर...
    नई पोस्ट में आपका इंतजार है

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