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Saturday, 10 December 2011

अफसोस कि ढ़ोल को उसकी पोल खुलने का एहसास नहीं हो रहा और वो इसी गुमान मे है जैसे किसी को कुछ पता ही न हो।


होता है ...होता है ....ऐसा भी होता है :)

5 comments:

  1. जो ढोल हो,उसकी पोल खोलने में समय व्यर्थ किया ही क्यों जाए?

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  2. अच्छा कहा...
    वाकई होता है :-)

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  3. koi b kaam krne k saath uddeshya hota hai... bilkul sach

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