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Wednesday, 14 December 2011

 एक खाली पन सा  है और इस खाली पन मे कमी है तो बस कुछ उपदेशकों की जो बस सिदान्तों और नीतियों की बात बताना शुरू करेंगे तो बस तब तक शुरू ही रहेंगे जब तक कानों पर हाथ रख कर विनम्रता से माफी न मांग ली जाए। लेकिन डर है अगर इस माफी को दिल पर ले लिया तो क्या होगा.....बवंडर के आने मे ज़्यादा देर नहीं।

2 comments:

  1. हहाहाहा ... सच कहा, मैं भी सूक्तियों से परेशान रहती हूँ , हाँ कभी कभी कम शब्दों में अच्छा भी लग जाता है

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