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Wednesday, 21 December 2011

इस तरह गायब न हुआ करो .........

यूं ही मन मे उठे कुछ रूमानी ख्याल----

इस तरह गायब न हुआ करो अचानक कि
सरे राह तुम को खोजता फिरूँ
और फिर तुम ये कहो कि
अजीब पागल हूँ मैं 

माना कि आदत नहीं डालनी
तुम्हारे साये की
न जाने क्यों इस साये को
अपना समझ बैठा हूँ मैं

न आया करो इस बंजर में
कोई गुलज़ार बन के
तुझे हमराह पाकर
बिखर उठता हूँ मैं

तेरा यूं आना और
यूं जाना अचानक
तू न समझना कभी
कितना तड़प उठता हूँ मैं
--------
To.
'My dear'
From and written by-----यशवन्त माथुर 

10 comments:

  1. इस तरह गायब न हुआ करो अचानक कि
    सरे राह तुम को खोजता फिरूँ
    और फिर तुम ये कहो कि
    अजीब पागल हूँ मैं ......प्यार में पागल होना ही सच्चे प्यार की निशानी है..खुबसूरत अभिव्यक्ति....

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  2. समझे ना समझे वो... पर बेटा कुछ तो है न

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  3. लाज़वाब! ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति..

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  4. man ke bhvo ki sundar abhivykti hai....
    itane acche bhav apke man me yu hi aa jate hai...
    wahh....

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  5. यूँ ही मन में उठे कुछ रूमानी ख्याल ,
    या ,हकीकत ब्यान करती पंक्तिया ,सच.... ?

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  6. प्यारी सी शिकायत कभी समझेगी वो भी !

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  7. जो प्रेम को पा ले,उसमें अनंत संभावनाएं हैं।

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  8. तुझे हमराह पाकर
    बिखर उठता हूँ मैं .... badhiya !

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