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Saturday, 7 January 2012

पूर्वाग्रह !

पूर्वाग्रह !...जब यह शब्द मैंने सब से पहले सुना था तब पापा से पूछा था यह कौन सा ग्रह है। मुझे ऐसा महसूस हुआ कि शायद यह कोई 10 वां नया ग्रह है ये भी संभवना थी कि पूर्वा नाम की कोई लड़की हो और उसके गृह (घर ) की बात हो रही हो। आखिर कन्फ़्यूजन का फ्यूजन ही कुछ ऐसा होता है जो अक्सर दिमाग का फ्यूज उड़ा देता है। लेकिन जब सिनसियरली नहीं सीरियसली हो कर अपनी क्लास लगवाई तब अपनी रिसर्च इस मुकाम पर पहुंची कि किसी के प्रति मन मे लगने वाला आग्रह नामक ग्रहण पूर्वाग्रह कहलाता है। यह ग्रहण कभी भी लग सकता है इसके लिए पूर्णिमा या अमावस्या का होना ज़रूरी नहीं है। (अब पूर्णिमा या अमावस्या का बायोडाटा नहीं पूछना प्लीज़)

पूर्वाग्रह आग्रह का एक प्रकार भी कहा जा सकता है ठीक उसी प्रकार जैसे आपके ब्लॉग पर टिप्पणी की नीचे मैं अक्सर यह लिख देता हूँ---"जो मेरा मन कहे पर आपका स्वागत है " एक आग्रह ही तो है कि मान्यवर पधारिए अगर आपकी मर्ज़ी हो तो ...लेकिन अगर आप न आएँ तो यह आपकी मर्ज़ी भी हो सकती है और पूर्वाग्रह भी।ठीक इसी प्रकार यदि आप बार बार बुलाएँ और मैं टिप्पणी (अधिकतर अपनी तकिया कलाम टिप्पणी --"बेहतरीन" ) के रूप मे प्रकट न हो सकूँ तो यह मेरा भी पूर्वाग्रह हो सकता है।

खैर यहाँ न बात ब्लोगिंग की हो रही है न टिप्पणी की क्योंकि अगर होने लगी तो आलोचना का ग्रहण लग जाएगा और पूर्वाग्रह विलुप्त हो जाएगा जो मैं नहीं होने देना चाहता।

पूर्वाग्रह सार्वभौमिक है जिसके लिए किसी विशेष प्रकार के देश काल वातावरण की आवश्यकता नहीं है बस आपके मन की आवश्यकता है जो कब कहाँ किस ओर चल दे कहा नहीं जा सकता। एक ऐसा सत्य है जिसे सत्य होते हुए भी हम खुद पर प्रकट रूप मे ज़ाहिर नहीं होने देते क्योंकि हम तो ऐसे हैं भईया ....भीतर से काले...बाहर से गोरे ...लगते हैं बिलकुल कागज से कोरे।(ओरिजनल तुकबंदी है जी ) अब कोई करे भी तो क्या ...जो आपको या मुझको देख कर अच्छा सोचे या बुरा सोचे हर सोच मे इस ग्रह का ग्रहण लगा तो होता ही है । कोई ज़रूरत से ज़्यादा  किसी को अच्छा लगने लगता है ...कोई खराब।  कमबख्त बीच का का कोई हिसाब ही नहीं होता। हो भी नहीं सकता पूर्वाग्रह चीज़ ही ऐसी होती है देखन मे छोटे लगें घाव करें गंभीर।

प्रवचन समाप्त हुए! 

18 comments:

  1. poorvagrah par vishleshan achcha laga.

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  2. पूर्वाग्रह न हो तो मेरा आग्रह स्वीकार करे.... कृपया मेरे " msg " का जबाब दें , माफ करें , आपका fb का msg box नहीं खुल रहा.... :(:(

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  3. पूर्वाग्रह सचेत भी करती है , आगे भी बढ़ाती है , वहम भी बनाती है .... पहले से खुद से सोचा परिणाम कुछ भी हो सकता है

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  4. sahi likha yaar
    shandar
    mere blog par bhi aaiyega
    umeed kara hun aapko pasand aayega
    http://iamhereonlyforu.blogspot.com/

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  5. likha to accha hai aapne magar mujhe jaane kyun aisaa lagaa jaise sab gol-gol baat hogai.... sab jaise mixup sa hogaya... ki aap exactly kahana kya chaah rahe hain ...aisaa lagaa mujhe jaise aap apni baaton men hee ulajh se gaye... yh mera poorvaagrah bhi ho sakta hai:) jo lagaa so kah diyaa ....

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  6. @ पल्लवी जी मैं तो कुछ भी कहना नहीं चाहता :)
    बस वही समझ लीजिये जो इस ब्लॉग का एड्रेस है :)

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  7. इतने गंभीर विषय को आपने बहुत ही हल्के-फुल्के तरीके से और रोचक शैली में प्रस्तुत किया, बधाई !

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  8. बहुत ही सहज और सरल अभिवयक्ति.....

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  9. पूर्वाग्रह कई बार बदल जाते हैं कई बार बने रहते हैं तमाम मुलाकात के बाद भी.....क्या करें इंसान ऐसे भी होते हैं.....आपको नए वर्ष की देर से शुभकानाएं।।।।।। वैसे में देर करता नहीं.हो जाती है

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  10. पूर्वाग्रह पर मजेदार विचार अच्छे लगे |
    आशा

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  11. प्रवचन को क्रमश : लगा कर छोड़ना चाहिए..आगे रास्ता खुला रहता है..

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  12. बेहतरीन.............
    :)

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  13. पूर्वाग्रह को समझा भी दिया आपने ...बातों बातों में...........

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  14. रोचकता से समझाया आपने..एकदम समझ में आ गया है.

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  15. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  16. यशवंत जी, संक्षेप में बहुत ही अच्छा आलेख! हास्य-व्यंग्य के साथ रुचिपूर्ण भी!

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