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Thursday, 19 January 2012

बेमतलब की बात

कुछ बातें बे मतलब की भी होती हैं। ज़रूरी नहीं हम जिससे जो बात करें उसका कोई खास मतलब भी निकले। वैसे मतलबी इंसान हर बात का मतलब निकालता है। चाहे वो सामान्यतः की जाने वाली नमस्ते ही क्यों न हो। एक मित्र ने एक बार एक सेठ जी को नमस्ते कर दी ...सेठ जी ने तपाक से पूछा हाँ भाई कितना चाहिए ?......मित्र ने कहा कि नहीं कुछ नहीं चाहिए अभी तो सेलरी मिली है ज़रूरत पर आप से कहेंगे। अब एक ज़रा सी नमस्ते का इतना एक्स्प्लेनेशन अगर देना पड़े तो कोई किसी से नमस्ते भी नहीं करेगा। इसलिए बेहतर हो यदि बे मतलब की बात का कोई अर्थ न निकाला जाए और उसे बेमत्तलब का ही रहने दिया जाए। 

6 comments:

  1. कई बार बेमतबल में भी मतलब छिपा होता है...

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  2. baato ka hamesha koi na koi matlab rahta hi hain

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  3. सच है....
    अर्थ का निरर्थ होते देर कहाँ लगती है..
    बढ़िया बात.

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