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Thursday, 1 March 2012

निम्नस्तरीय ब्लॉगर

"अरे ये तुमने क्या लिखा है...बहुत ही साधारण और निम्न स्तर का ...ऐसा तो कोई भी लिख सकता है .....तुमने कौन सा तीर मार लिया ?....खामख्वाह के ब्लॉगर बने फिरते हो" ...
 एक दिन सपने मे मुझ से किसी ने कहा ...मगर मेरी भ्रष्ट बुद्धि ने यह सोच कर लिखना जारी रखने का फैसला किया कि मैं कुछ नहीं से कुछ तो हूँ ...कुछ न लिखने से बेहतर मुझे ऐसा ही निम्न स्तर का लिखना (जैसा मैं लिखता हूँ) अच्छा लगता है । 

14 comments:

  1. कुछ न कहने से बेहतर है की कुछ अंट-शंट ही सही या गलत बयानी ही लिखेंगे तो सही...
    जो भी हो वो निकलेंगे तो दिल-दिमांग से न फिर व्यक्त होंगे कागज़-कलम के माध्यम से ही...
    संकोच भला क्योंकर...

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  2. प्रमाणित हो गया कि कोई आपके ब्लॉगर बनने से डरता है. वह जो कोई भी है, व्यक्ति या विचार, उसे मन से निकाल दीजिए. फिर जो आप लिखेंगे वह शुद्ध रूप से आपका होगा. लेखन की गुणवत्ता का फैसला समय करता है.

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  3. स्तर....पहले निम्न ही होता है ....अनुभवों से निखरता .....उच्चता पर पहुँचता है ...../ पहले पायदान ..फिर देहलीज़ के पार ...../ सीढ़ी पर पाँव जमीन से ही उठाया जाता है.......उसके बाद ही शिखर मिलता है ....../ आसमान से तो कोई नही टपकता न ......सब ज़मीन से ही उठ कर आसमान पर पहुँचते है ...../ .खामख्वाह तो कुछ नही होता .....

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  4. ऐसा ही कुछ विचार लिए हमने भी ब्लॉग शुरू किया था....लोगों को बताया भी तब जब ६०-७० रचनाकार फोलो करने लगे और थोड़ी बहुत प्रशंसा भी मिलने लगी :-)
    खुद पर यकीं सबसे ज़रूरी है...
    सस्नेह

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  5. दिल कि बात लिखने में कैसा संकोच ...... किसी को बुरी लगेगी तो बहुतों को अच्छी भी तो लगेगी ....तो ऐसे ही लिखते रहिये... शुभकामनाएँ

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  6. हद है ……………अब स्तर भी सोचना पडेगा क्या………अरे हमारा मन है और उसमे उपजे ख्याल अब वो चाहे जैसे हों यदि हमे सुकून पहुँचाते हैं तो हम तो जरूर लिखेंगे जी और आप भी लिखिये बिना किसी से डरे और डर लगे तो हमे बता देना ……थोडी झाड फ़ूंक करवा देंगे मगर लिखना नही छोडना ……………कल कोई कह दे सांस लेना छोड दो ये तो स्तरहीनता है तो फिर ?????????????

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  7. ब्लॉगर एक लेखक होता है , इसमें कैसा स्तर और किसका स्तर ...यहाँ सब बराबर हैं !

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  8. अपने सुख के लिए लिखो..........................तो यह सब बातें न दिल में आयेंगी...न दिमाग में...ना ही सपनों में.

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  9. छोडिये जी ये बेकार की बातें ...कुछ लोगों की फितरत ही होती है ऐसी..आप लिखिए बिंदास.

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  10. कुछ तो लोग कहेंगे ही क्यूंकि लोगों का काम है कहना और आप कब से लोगों के बारे में सोचने लगे???छोड़िये लोगों को और वही कीजिये जो आपका दिल कहे।

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  11. हम सभी अपनी खुसी के लिए लिखते है..... लोग क्या सोचते है उस पर ध्यान न दे.....

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  12. देर से आने से एक फायदा होता है कुछ लिखना नहीं पडता पहले से ही इतना कुछ लिखा जा चुका होता है.... हा-हा-हा-हा .... हो गई न निम्नस्तरीय बात .... :)

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  13. हम तो अपने ख़ुशी के लिए लिखते है
    इसमें किसी को क्या हर्ज .

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  14. खिड़की दरवाज़े खुले रहने दो हवा का ताज़ा झोंका आने दो .लिखना विरेचन है खुद से मुक्त होना है रोशन दान है ,सेफ्टी वाल्व है खुद को बचाने का .लिखो और जियो ...

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