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Tuesday, 24 July 2012

कहने को कुछ बातें हैं,कुछ शब्द हैं और मन में हलचल है ,तुम समझती सब हो पर समझ कर भी अनजान बनी रहती हो ,शायद मैं ही कुछ कह दूँ ...कभी...किसी दिन....पर इतना याद रखना ,मेरी ये खामोशी भी ....है तो सिर्फ.....तुम्हारे लिये।

2 comments:

  1. shabd gaun ho jate hain tabhi khamoshi bolti hai...

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  2. किसके लिए भाई?????
    :-)

    सस्नेह

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