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Thursday, 2 January 2014

नया साल मुबारक

नया साल आ गया।आने की साथ ही दोस्तों की शुभ कामनाओं का अंबार फेसबुक और मेल पर लग गया।
मैंने भी सबको शुभ कामनाएँ दीं।

ऐसे मे फेसबुक पर मेरे बधाई संदेश के बाद एक दो मित्रों का जवाब आया कि वह क्षमा चाहते हैं, वह हिन्दुस्तानी हैं और उनका नया साल  चैत्र के महीने से शुरू होता है। लिहाजा अंग्रेजों के नए वर्ष को मानने और मनाने का प्रश्न नहीं उठता।
चलिये ठीक है उनकी अपनी सोच है और हम किसी की सोच को बदलने का कोई हक नहीं रखते; पर उनके इस जवाब ने कुछ प्रश्न मेरे दिमाग मे खड़े किये--

  • हिन्दुस्तानी होने का इतना ही ख्याल है तो उनके ब्लॉग हिन्दी के अलावा अङ्ग्रेज़ी मे भी क्यों हैं ?
  • क्यों आप अङ्ग्रेज़ी तारीख के हिसाब से अपना जन्मदिन मनाते हैं ?
  • जिस फेसबुक और गूगल के प्लेटफॉर्म का प्रयोग अपने मित्रों के संपर्क मे रहने और अपने विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए करते हैं उनके मुख्य कर्ता धर्ता अंग्रेज़ ही हैं । 
  • जिस कंप्यूटर पर बैठ कर हम और आप लिख रहे हैं उसे भी मूल रूप मे अंग्रेजों ने ही आविष्कृत किया भले ही इन आविष्कारों के सिद्धान्त प्राचीन भारतीय ग्रन्थों से लिए गए हों। 
  • जो वेषभूषा हम और आप आजकल धरण करते हैं वह भी अंग्रेजों की ही देन है। 

इस तरह कई प्रश्न और भी दिमागमें घुमड़ने लगे लेकिन मैं फालतू की बहस न करता हूँ न इसमे पड़ना चाहता हूँ। भारतीय संस्कृति सर्वधर्म समभाव की रही है, यहाँ अनेकों आक्रांताएँ आईं और गईं ।
धारयाति इति धर्म: की बात भी यहीं कही गयी है। अतःभले ही 1 जनवरी से शुरू होने वाला साल विदेशियों की देन हो हमें उसे ठीक वैसे ही उत्साह के साथ मनाना चाहिए जिस उत्साह से हम होली,दीवाली,ईद और क्रिसमस आदि मनाया करते हैं।

सभी को नव वर्ष 2014 सपरिवार शुभ और मंगलमय हो।